Tuesday, May 8, 2012

वक्त नही....

हर ख़ुशी है लोगो के दामन में,
पर एक हंसी के लिये वक्त नही ! 

दिन रात दौडती दुनिया में,
जिंदगी के लिये ही वक्त नही !

मां की लोरी का एहसास तो है ,
पर मां को मां कहने का वक्त नही !
सारे रिश्तो को तो हम मार चुके,
अब उन्हे दफनाने का भी वक्त नही!

सारे नाम Mobile में है,
पर दोस्ती के लिये वक्त नही !
गैरो की क्या बात करे,
जब 
अपनो के लिये ही वक्त नही !

आखो में है नींद  बडी,
पर सोने का वक्त नही !
दिल है  गमो से भरा,
पर रोने का भी वक्त नही !

पैसो की दौड में ऐसे दौडे,
कि थकने का भी वक्त नही !
पराये एह्सासो की क्या कदर करे,
जब अपने सपनो के लिये ही वक्त नही !

तू ही बता ए  जिंदगी,
इस जिंदगी का क्या होगा !
कि हर पल मरने वालो को,
जीने  के लिये भी वक्त नही !





~ Karamvir Singh Chahal

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