Sunday, January 22, 2012

कहा गये वो दिन

कहा गये वो दिन
जब तितली देखकर उछला करते थे ,
बारिस के रिमजिम अपनी मे
अपनी नाव चलाया करते थे
कापी के पन्ने फाड कर
जहाज उडाया करते थे
कहा खो गये वो दिन

कहा गये वो दिन
जब इक बार रोने पर
सब काम छोड कर
चुप कराया करते थे
आज दिल रोता है,
फिर भी कोई नही देखता
हमारी छोटी सी मुस्कान
सबको खुसिया दिया करती थी
कहा खो गये वो दिन

कहा गये वो दिन
जब गुलक के चंद सिक्के भी
खुसिया दिया करते थे
आज हजरो के बाद भी
इतना गम छाया है
कहा खो गये वो दिन

कहा गये वो दिन
जब बाबूजी की डाट खाकर भी,
मा की गोद मे सो जाया करते थे
सुबह फिर किलकारिया भरा करते थे
आज किसी की इक बात भी परेसान कर देती
कहा खो गये वो दिन

कहा गये वो दिन
जब पाच पेसे की टोफी भी मिठी लगा करती थी
आज दुकान की मिठाई भी फिकी लगती है
काश कि वापस आ सकती वो मिठास
कहा खो गये वो दिन

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